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Friday, 26 June 2020 21:05

PURASKAR KAHANI KA PRASHNOTTAR, by Dr Sandhya Sinha

 
 
पुरस्कार के प्रश्नोत्तर
 
जयशंकर प्रसाद का परिचय दीजिये..
जन्म प्रसाद जी का जन्म माघ शुक्ल 10, संवत्‌ 1946 वि० (तदनुसार 30जनवरी 1889ई० दिन-गुरुवार) को काशी के सरायगोवर्धन में हुआ।
जीवन परिचय 
जयशंकर प्रसाद
जयशंकर प्रसाद हिन्दी कवि, नाटककार, उपन्यासकार तथा निबन्धकार थे। वे हिन्दी के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। 
 
 
=> प्रसाद की आरंभिक कहानियों का संकलन कौन सी है??
उत्तर- सन 1912 में ‘ छाया ‘ नाम से प्रकाशित हुआ था। उनकी अंतिम कहानी संग्रह ‘ कौन सी है??
 इंद्रजाल ‘ उनके निधन के 1 वर्ष पहले सन 1936 में प्रकाशित हुआ था।
 
 
 
 
=पुरस्कार कहानी की मूल चेतना क्या है??
=> ‘पुरस्कार’ उनकी ऐसी  रचना है जिसमें प्रेम और मुक्ति चेतना का विकास लक्षित किया जा सकता है।
 
पुरस्कार की कथावस्तु बताईये
 
=> राजा द्वारा मधुलिका की कृषि भूमि अधिग्रहित कर लेने पर भी वह पुरस्कार नहीं लेती क्योंकि वह उसकी पैतृक संपत्ति थी जिसे बेचना वह अपराध समझती थी।
 
=> स्वर्ण मुद्राओं को अस्वीकार और जीवन यापन के लिए कठिन श्रम उसकी देशभक्ति और ईमानदारी का प्रमाण है।
 
=> राष्ट्रीय प्रेम एवं मुक्ति चेतना का एक अन्यतम उदाहरण और है जहां कौशल पर कब्जे की योजना बनाते अरुण का रहस्य व राज्य सैनिकों के सामने उद्घाटित करती है , और पुरस्कार स्वरूप खुद को प्राणदंड के लिए प्रस्तुत कर देती है। क्योंकि राजा ने अरुण को प्राण दंड देने का आदेश दिया था और मधुलिका अरुण से प्रेम करती थी।
 
मधुलिका का अंतर्द्वंद्व क्या था ?=> 
 मधुलिका को अंतर्द्वंद से गुजरना पड़ा कि एक तरफ मातृभूमि की रक्षा का सवाल और दूसरी और प्रेम का लहराता समुद्र।
 
मधुलिका ने किसे चुना??मधुलिका ने बुद्धिमानी का परिचय दिया उसे देश और प्रेम दोनों के प्रति ईमानदारी पर संदेह नहीं किया जा सकता।
 
मधुलिका के प्रेम की पराकाष्ठा क्या थी? 
=> पुरस्कार के रुप में प्राणदंड की मांग और अरुण के साथ खड़ा हो जाना प्रेम की पराकाष्ठा का प्रमाण है।
 
 
प्रसाद ने इतिहास पुराण और संस्कृति का उपयोग अपनी कहानियों में किस उद्देश्य से किया है?
=> प्रसाद ने इतिहास पुराण और संस्कृति का उपयोग अपनी युगीन आवश्यकताओं के संदर्भ में जनता की इच्छा आकांक्षाओं को स्वर देने के लिए ही किया है।
 
कहानी की मूल संवेदना बताईये।
=> मूल संवेदना उस क्षेत्र से मिलती है जहां कर्तव्य एवं निष्ठा का निर्वाह किया गया हो।
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